Intezaar

Ek nayi subah ke intezaar mein

Raatein beet-ti chali gayi

Par din tham se gaye

Aur mai aaj aur kal ke beech

Ataki saansein ginti rahi

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अलविदा

कल को आप चले जाएंगे
तो फ़िर हम किसे याद आएंगे
जिंदगी एक है
और वक्त कुछ कम है
हम अपनी गलतियों की सज़ा
यहीं इसी वक्त पाएंगे
दिखेगी जब जब आपकी सूरत
सपनों की पाक दुनिया में
तो बंद आंखे भी अश्कों से ख़ुद बखुद भर आएंगी
मगर आप फिर भी ना आएंगे
और हम कहीं फ़िर खो जाएंगे
याद करके आपकी उस हंसी को
हम एक बार फिर यूंही रो जाएंगे